लापता

कई दिनों से मेरा पता पूछ रहा है कोईतुम ख़ामोश क्यों हो?कह क्यों नहीं देते कहाँ हूँया फिर डरते हो,

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तुम जेल में हो

अपने ही घर में क़ैद कर दिए जाओवैसी ज़िन्दगी कैसी लगती है?रोज़मर्रा का दायरा तुम्हारा जब कुछ नारों में सिमट

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जग ज़ाहिर

कहकर, वो कहते हैं, दिल हल्का हो जाता हैक्या कहते हैं जब दिल भारी हो औरप्रेम पुराना , जग ज़ाहिर

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कीचड़

कीचड़ में गिरे तुम क्या ख़ूब मैले निकलेजब मौक़ा मिला धवल नेह कातो चीख़ उठा तुम्हारा प्यार –आह मुझे सौंदर्य

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